
वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव, इन्फ्रारेड तापन प्रणाली के लिए एक गंभीर समस्या हैं। कभी वोल्टेज स्थिर रहता है, लेकिन अगले ही दिन वोल्टेज में अचानक बदलाव हो जाता है; इससे उपकरणों पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इससे लैंपों की आयु कम हो जाती है, एवं उनका प्रदर्शन भी कम हो जाता है। हमने अपने इलेक्ट्रिक हीटर में ऐसी वोल्टेज-संतुलन प्रणाली लगाई है, जो वास्तविक वोल्टेज स्थितियों को ध्यान में रखकर ही ऊर्जा आपूर्ति करती है – न कि कागज पर दर्शाई गई स्थितियों को।
वास्तव में क्या हो रहा है?
इस हीटर में क्वार्ट्ज-ट्यूब उपकरण है, जो बंद-लूप परिपथ में काम करता है। यह वास्तविक वोल्टेज स्थितियों को निगरानी में रखता है, एवं वास्तविक समय में ही ऊर्जा आपूर्ति को समायोजित करता है। इससे वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव कम हो जाते हैं, एवं फिलामेंट पर लगने वाला भार भी स्थिर रहता है। टाइमर की मदद से आप तापमान को पहले से ही निर्धारित कर सकते हैं; इससे हीटर को अधिक ऊर्जा खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इसका क्या लाभ है?
इससे इन्फ्रारेड तापन प्रणाली से निरंतर एवं स्थिर तापन प्राप्त होता है। इससे उपकरणों पर अतिरिक्त भार कम पड़ता है, एवं उनकी आयु भी बढ़ जाती है। टाइमर की मदद से ऊर्जा का उपयोग भी कम हो जाता है – केवल तभी ही ऊर्जा खर्च होती है, जब वास्तव में इसकी आवश्यकता होती है।
कुछ व्यावहारिक सुझाव:
यह डिज़ाइन बहुत ही उपयोगी है, लेकिन इसके लिए ठोस ग्राउंडिंग एवं उचित सर्किट क्षमता आवश्यक है। इसे विशेष आउटलेट में ही जोड़ें, एवं अपने घर की वोल्टेज स्थितियों की जाँच करें। यदि वोल्टेज में अत्यधिक उतार-चढ़ाव है, तो इसे होम स्टेबिलाइज़र के साथ ही उपयोग में लाएं।
सर्वोत्तम परिणामों हेतु…
टाइमर को अपने सामान्य उपयोग-समय के अनुसार ही सेट करें। हीटर को हवा से भी सुरक्षित रखें – हवा के कारण भी तापन प्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है, भले ही वोल्टेज स्थिर ही क्यों न हो।